सफलता के सूत्र जो भागवत गीता में बताए गए है ||

सफलता के सूत्र

आज के समय मे हर व्यक्ति अपने जीवन मे सफल होना चाहता है | सभी के पास अपने लक्ष्य है | और वह उसे पाने के लिए मेहनत कर रहे है | लेकिन क्या आप जानते है | की सफलता क्या है | सफलता का राज क्या है | व सफलता के सूत्र क्या है |
अधिकतर लोग अपने कार्य को पूरी मेहनत से करने मे लगे रहते है | पर सफलता हासिल नहीं कर पाते |जिसका कारण है -सफलता का अर्थ न समझना |

इस लेख (प्रवचन) मे कहानी के माध्यम से आपको पता चलेगा, की असल मे सफलता क्या है, सफलता
का राज क्या है, व जीवन मे सफलता कैसे पाए, और साथ ही सफलता के श्रीमद्भागवत गीता उपदेश पढ़कर आप सफलता का मूल मन्त्र व जीवन मे सफलता पाने के तरीके और सफलता के सूत्र जानेगे | तो आइए एक कहानी के माध्यम से शुरू करते है |

किसान व साधु की कहानी - सफलता के सूत्र

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एक गांव मे एक गरीब किसान रहता था | वह बहुत परिश्रमी था | दिन रात मेहनत करता व अपने परिवार के साथ ख़ुशी से रहता था | एक बार गांव मे एक साधु आए | किसान साधु को आदर के साथ अपने घर लाया | और उनके भोजन व स्नान की वयवस्था की | साधु उस किसान की भक्ति से प्रसन्न हुए | और कहा तुमने मेरा आदर सम्मान किया |
यदि तुम्हे कुछ परेशानिया हो तो कहो, मे उसे दूर करने मे तुम्हारी मदद करुगा | किसान ने कहा - हे महात्मा मे बहुत परिश्रम करता हु | लेकिन ये गरीबी दूर नहीं कर पा रहा हु | मे अपने जीवन मे सफल नहीं हो पा रहा हु | कृपया कर मुझे सफलता के सूत्र बताए | जिससे मे सफलता हासील कर सकू | साधु ने कहा ठीक है | मे तुम्हे सफलता के सूत्र बताऊंगा |
परन्तु उससे पहले ये जानना आवश्यक है, की सफलता क्या है |
सफलता क्या है
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 साधु ने कहा सफलता का अर्थ है 'आत्म संतुष्टि ' अर्थात जब आप संतुष्ट हो जाएगे, तो वही आपके लिए आपकी सफलता होंगी | साधु ने कहा - चलो इसे एक उदाहरण से समझते है | यदि आप एक किसान हैतो आपके लिए सफलता होंगी एक अच्छा घर, अच्छे कपडे और खाने के लिए अच्छे पकवान यदि आपको यह मिल जाता है | तो आप संतुष्ट हो जाओगे | और यही आपकी सफलता होंगी |
लेकिन यदि मे बात करता हु तुम्हारे राजा की, तो उसके लिए सफलता कई और राज्यों को जितने मे है | अर्थात आपके पास जो भी है | यदि उससे आप संतुष्ट है | तो आप सफल हो, अन्यथा एक राजा भी जिसके पास सबकुछ है | वह भी अपने आप को असफल मानेगा |
किसान ने कहा अब मे जान गया की सफलता क्या है | लेकिन यह हमारी आंतरिक सफलता है | हमारी बाह्य सफलता क्या है | व बाह्य सफलता के सूत्र क्या है |
साधु ने कहा -

जीवन की असल सफलता

  1. जब आप 4 वर्ष के होते है, तो आपकी सफलता होती है, की आप वस्त्रो को गिला नहीं करते |
  2. 8 वर्ष की सफलता यह है, की आप अपने घर वापस आने वाले मार्ग को भूलते नही है |
  3. 12 वर्ष की सफलता यह है, की आप अपने कुटुंब मे अच्छे रिश्ते बना सके |
  4. 18 वर्ष की सफलता यह है, की आप मदिरा, व अन्य दूषित कर्मो से दूर रहे |
  5. 25 वर्ष की सफलता यह है,की आप अपने व्यवसाय या कार्य करने के लिए निकल पड़े |
  6. 30 वर्ष की सफलता यह है, की आपका पारिवारिक वयक्तित्व अच्छा हो |
  7. 35 वर्ष की उम्र मे आपके लिए सफलता है, की आप धन बचाने की कला सीखे |
  8. 45 वर्ष की उम्र मे सफलता यह है, की आप अपना युवापन बरकरार रखे |
  9. 55 वर्ष की उम्र मे आपकी सफलता यह है, की आप अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने मे सक्षम हो |
  10. 65 वर्ष की उम्र मे आपकी सफलता यह है, की आपका शरीर अभी भी निरोगी हो |
  11. 70 वर्ष की उम्र मे सफलता यह है, की आप किसी के ऊपर निर्भर न रहे आप आत्मनिर्भर रहे |
  12. 75 वर्ष की उम्र मे आपकी सफलता यह है, की आप अपने पुराने मित्र या रिश्तेदारो से अब भी मिलते हो |
  13. 80 वर्ष की उम्र मे आपकी सफलता यह है, की आपको अब भी अपने घर का मार्ग याद हो |
  14. 85 वर्ष की उम्र मे पुनः आपकी सफलता यह है, की आप अपने वस्त्र गीले न करते हो |
किसान ने कहा - अब मै यह जान चूका हु, की असल मे सफलता क्या है, परन्तु यदि इन नियमों का पालन हम कर पाते तो हम भी साधु न बन जाते | हमारे जीवन मे कई सारी चुनौतियां व लक्ष्य सामनेआते है | हम उन पर सफलता कैसे हासिल करे |
हे महात्मा, मुझे सफलता का मूल मन्त्र व सफलता पाने के तरीके , सफलता के सूत्र बताए |

सफलता का रहस्य


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साधु ने कहा चलो मेरे साथ और दोनों जंगल की और चल दिये | चलते चलते वे दोनों एक आम के बाग के पास पहुचे | साधु ने कहा - मुझे आम खाना है | क्या तुम मुझे कुछ आम लाकर दे सकते हो | पेड़ काफ़ी ऊंचे थे | और किसान को उनपर चढ़ना नहीं आता था | वह तुरंत पत्थर मारकर आम तोड़ने की कोशिश करने लगा | पर आम नहीं गिरे | उसने सोचा की ये पेड़ काफ़ी ऊंचा है | वह किसी और पेड़ के निचे गया, और पत्थर मरना शुरू किये | परन्तु इस बार भी आम नहीं गिरे | और इसी तरह किसान पेड़ बदलता रहा, लेकिन आम न लेकर आ सका | और निराश होकर साधु के पास लौट गया |

साधु के पूछने पर उसने सारी बाते बता दी | साधु हसने लगा | और उस किसान को समझाने लगा | की जब तुमने एक पेड़ पर बहोत सारे पत्थर मारे फिर भी आम न गिरने पर तुमने पेड़ ही बदल दिया | लेकिन आम तोड़ने का तरीका नहीं बदला | और इसी तरह तुमने हर बार पेड़ बदला | लेकिन तरीका नहीं बदला | मानाकी पेड़ ऊंचा था | लेकिन जितना प्रयास तुमने अलग-अलग पेड पर किया | उतना एक ही पेड़ पर करते | पेड़ नहीं तरीके को बदलते, तो शायद तुम आम तोड़ने मे सफल हो जाते |

सफलता के मूल मंत्र

साधु ने कहा - यही तुम्हारे जीवन मे भी होता है | आप अलग अलग छेत्रो मे कार्य करते हो | और जब एक काम सफल नहीं हो पाते | तो उसे बदल कर दूसरे काम मे लग जाते हो |

और इस तरह आप अपनी ऊर्जा को बाट देते हो |

यदि आपको अपने जीवन मे सफल बनना है | तो पहले आपको अर्जुन बनना होगा | जिसे केवल चिड़िया की आँख दिखती है| उसी प्रकार आपको केवल आपका लक्ष्य दिखना चाहिए |
यही सफलता का मूल मन्त्र व सफलता के सूत्र है

सफलता कैसे पाए

किसान ने कहा- की यह बात तो मे समझ गया | लेकिन मेरे पास तो कोई लक्ष्य ही नहीं है | मुझे तो सुबह से खेतो मे मेहनत करना पड़ता है | जो मे हमेशा से करता आया हु | क्या आप मुझे कोई लक्ष्य दे सकते है | साधु ने कहा ठीक है | तुम बस खाना खाने से पहले रोज भगवान की पूजा कर लिया करना |

किसान ने कहा इसमें तो काफ़ी समय लग जाएगा | शायद मुझसे ये न हो पाएगा | साधु ने कहा ठीक है, तुम खाना खाने से पहले अपने घर से निकलकर अपने मित्र को ही देख लेना | जो तुम्हारे घर के आगे रहता है | हर चीज भगवान का ही अंश है | लेकिन तुम्हे यह नियमित करना होगा | किसान ने कहा ठीक है
और वह इस सफलता के सूत्र को जानकर साधु से आज्ञा लेकर, घर आ गया |

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नियमितता का फल

अब वह रोज खाना खाने से पहले उसके मित्र को देखता | काफ़ी समय बीत गया | एक दिन जब वह खाना खाने से पहले उसे देखने गया | तो वह घर पर नहीं था | वह सुबह सुबह ही खेत की और चला गया था | किसान थोड़ा जल्दी मे था | तो वह दौड़कर खेत की और चला गया | वहा उसका मित्र कुछ कार्य कर रहा था | और अचानक उसके मित्र को सवर्ण से भरा एक घड़ा मिल गया |

किसान ने दूर से ही अपने मित्र को देख लिया | परन्तु वह उस घड़े को नहीं देख पाया था | और लौटने लगा | तब तक उसके मित्र ने भी उसे देख लिया | और सोचा की शायद वह इस घड़े को दुख चूका है | मित्र घबरा गया | और उसने किसान को आवाज लगाई | और पास बुलाने लगा | किसान ने कहा नहीं अब मे जा रहा हु | मैंने तुम्हे देख लिया है | उसके मित्र ने कहा - तुमने मुझे देख लिया तभी तो बुला रहा हु | और दोनों ने आपस मे सवर्ण मुद्राओ को बाट लिया |

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और इस तरह किसान सफलता के सूत्र का पालन करते हुए धन समृद्धि से भरपूर हो गया |


भागवत गीता में बताए गए सफलता के सूत्र -


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सफलता पाने के लिए भागवत गीता ज्ञान या महाभारत गीता ज्ञान, इन सफलता के सूत्र को अपनाकर आप अपने जीवन मे हर कार्य मे सफल हो पाएगे |

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 1  
" क्रोध से भ्रम पैदा होता है, और भ्रम से बुद्धि भ्रष्ट होती है,और जब बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, तो तर्क नष्ट हो जाता हैऔर जब तर्क नष्ट हो जाता है, तो व्यक्ति का पतन निश्चित है "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 2 
 "जो मन को नियंत्रित नहीं करते,उनके लिए मन ही सबसे बड़ा शत्रु बन जाता है "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 3 
" आत्म ज्ञान के तलवार से काटकर,अपने हृदय से अज्ञान के संदेह को दूर कर दो,अनुशासित रहो, उठो, जागो, और आगे बड़ो "
|| सफलता के सूत्र ||
श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 4 
" मनुष्य अपने विशवास से ही निर्मित होता है,वह जैसा जैसा विशवाश करता है,वैसा ही बनता जाता है "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 5 
" इस जीवन मे कुछ भी नहीं खोता, न ही कुछ भी व्यर्थ जाता हैअर्थात आप जो कुछ भी कर रहे है,आज नहीं तो कल आपको उसका फल अवश्य मिलेगा "
|| सफलता के सूत्र ||



गीता के अनुसार सफलता के सूत्र


श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 6 
"अप्राकृतिक कर्म तनाव पैदा करते है,अर्थात मनुष्य को ऐसा कोई भी कर्म नहीं करना चाहिएजिसे करने की मनाही हो "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 7 
"जब आप अपने कार्य मे आनंद खोज लेगे,तभी आपको पूर्णता प्राप्त होती है "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 8 
"अपनी सोच को सकारात्मक बनाएक्युकी आपकी सोच ही आपको सफल दिलाएगी "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 9 
"परिश्रम ही सफलता की कुंजी है "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 10 
"कर्म करो फल की चिंता मत करो "
|| सफलता के सूत्र ||

इस लेख (प्रवचन) मे आपको बताया गया - सफलता क्या है, जीवन मे सफलता पाने के तरीके, सफलता के सूत्र व सफलता के लिए श्रीमद्भागवत उपदेश जिसे अपनाकर आप भी अपने जीवन मे सफल हो सकते हो

प्रवचन

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