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RJ Kartik : जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता RJ Kartik ने बताया अपनी स्टोरी में ||

RJ Kartik : जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता RJ Kartik ने बताया अपनी स्टोरी में ||

RJ kartik

RJ Kartik जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता:- 

यह कहानी उनके लिए जिन्हें कोई रास्ता नहीं दिख रहा इसका रास्ता  RJ Kartik  ने कुछ इस तरह बताया है
ये कहानी एक लड़के की है | 24 साल का एक लड़का जो सेठ के यहाँ पर नोकरी करता था | उसके माँ बाप अब इस दुनिया में नहीं थे | जिंदगी बड़ी परेशानी में चल रही थी | rj kartik
वो जाता था रोजाना पैसे कमा कर के घर आता था | खाना बनाता था खाता था और सो जाता था | एक दिन उसने देखा की चार रोटी और थोड़ी सी सब्जी बनाई हाथ महू धो कर के वापस आया तब तक के तिन रोटी बची उसे कुछ समझ नही आया | फर दुसरे दिन भी यही हुआ फिर तीसरे दिन उसने ध्यान रखा और उसने चूहे को पकड़ लिया |
वहा एक बड़ा मोटा सा चूहा था जो रोटी ले कर जा रहा था | चूहे को पकड़ा तोह चूहे ने कहा भैया मेरी किसमत का क्यू खा रहे हो | मेरी रोटी तुम मुझे खाने दो ऐसा चूहे ने लड़के से कहा | लड़का बोला मेरे पास ज्यादा पैसा नहीं है | मैंने सिर्फ चार रोटिया बनाई है | उसमे से भी एक तुम ले जा रहे हो में क्या करूँगा मेरी ज़िन्दगी ने मुझे बेहाल कर रखा है | rj kartik
चूहे ने कहा की तुम्हारे सारे सवालो के जवाब तुम्हे एक इंसान दे सकता है | लड़के ने पूछा की कोन है वो | तो चूहे ने जवाब दिया की वो है गौतम बुध उनके आश्रम में जाओ उनसे अपनी जिंदगी के सारे सवाल पूछो वो तुम्हे रास्ता बताएँगे की करना क्या है |
लड़के ने चूहे से कहा ठीक है और लड़के ने चूहे की बात मान ली और गौतम बुद्ध से मिलने को चल पड़ा | और अपने सेठ से छुट्टी ले ली 5-6 दिन का लम्बा रास्ता था रात हो गई | इस लड़के को कुछ दिखाई नही दे रहा था फिर थोड़ी दूर पर एक हवेली दिखाई दी लड़का वहा गया और वहा जा कर के शरण मांगी |RJ Kartik


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हवेली की मालकिन ने पूछा बेटा कहा जा रहे हो | तो लड़के ने कहा गौतम बुद्ध के आश्रम जा रहा हु उनसे मिलने के लिए तो मालकिन ने कहा की बहुत बढ़िया जगहे जा रहे हो |
गौतम बुद्ध से हमारे एक सवाल का जवाब ले कर आना अगर वो सवाल का जवाब दे दे तो लड़के ने कहा जरुर आपका सवाल पुछुगा बताइए तो हवेली की मालकिन ने कहा की बेटा मेरी २० साल की बेटी है जो २० सालो से एक शब्द नहीं बोली है वह बोल नहीं सकती हे बस उनसे पुच लेना की ये बेटी कब बोलेगी | यह बोलते बोलते उनकी आँखों में आंसू आ गए | लड़के ने कहा आप माताजी परेशान मत होइए में पुछ लूँगा | rj kartik
लड़का अगले दिन चल पड़ा रास्ता बहोत ज्यादा लम्बा था रस्ते में उसे बड़े बड़े पहाड़ मिले ऊँचे ऊँचे पहाड़ बर्फ वाले पहाड़ उसे समझ नही आ रहा था की मै इसे कैसे पार करूँगा बड़ी देर हो जाएगी | तभी उसे एक जादूगर दिखा जो वहा पर बैठ कर तपस्या कर रहा था | वह जादूगर के पास गया और उससे बोला की मुझे गौतम बुद्ध के पास जाना हे | रास्ता तो बोहोत ही परेशानी वाला लग रहा है | मै इसे कैसे पर करुगा |RJ Kartik - motivational story
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जादूगर ने कहा की गौतम बुद्ध से मिलने जा रहे हो | यदि तुम मेरे एक सवाल का जवाब ले कर जाओ तो मै तुम्हे ये पहाड़ फटाफट पार करवा दूंगा | लड़के ने कहा अपना सवाल बताओ | तो जादूगर ने कहा की हजार सालो से में यहाँ बेठ कर के इस बर्फ के पहाड़ क बिच तपस्या कर रहा हु स्वर्ग जाने के लिए पर मुझे समझ नही आ रहा की में स्वर्ग कब जाऊंगा तो लड़के ने कहा ठीक हें में आपके सवाल का जवाब ले कर के आ जाऊंगा | rj kartik
फिर जादूगर ने अपनी छड़ी की शक्ति से लड़के को पहाड़ पार करवा दिया | मैदानी इलाका आ गया वहा पर एक बड़ी सी नदी थी | वहा पर लड़के के सामने फर से समस्या थी की नदी केसे पार करे | तभी उसे वहा पर एक बड़ा सा कछुवा दिखा | उसने कछुवे से मदद मांगी की आप अपनी पीठ पर बेठा कर के मुझे नदी पार करवा दीजिये कछुवे ने कहा ठीक हे | rj kartik
 जब नदी पार कर रहे थे तो कछुवे ने लड़के से पूछा कहा जा रहे हो तो लड़के ने कहा गौतम बुद्ध से मिलने जा रहा हु | कछुवे ने कहा वाह यार बड़ी अच्छी जगह जा रहे हो एक काम करना मेरे सवाल का जवाब भी ले कर आ जाना तो लड़के ने कहा आपका सवाल भी बताइए तो कछुवे ने अपना सवाल बताया की बड़े टाइम से ५०० सालो से में नदी में हु और ड्रैगन बन्ने की कोशिश कर रहा हु पर ड्रैगन बन नहीं प् रहा हु में ड्रैगन कब बनुगा बस ये पूछ कर के आ जाना लड़के ने कहा ठीक हे | rj kartik
 लड़का गौतोम बुद्ध के पास पंहुचा वहा देखा प्रवचन चल रहा था |प्रवचन के ख़तम होने के बाद गौतम बुद्ध ने कहा अब जिसको भी सवाल पूछना ह वो पूछ सकता है | पर शर्त ये है की सिर्फ तीन प्रश्न आप पूछ सकते हो अब लड़के के पास तीन सवाल पहले से थे |RJ Kartik


rj kartik

अब लड़के के सामने समस्या थी की किसके सवाल को छोड़ा जाये और किसका सवाल पूछा जाये 


  1. लड़के के दिमाग में पहेली तस्वीर आई हवेली की मालकिन की तो उसे लगा की वो तो अपनी बेटी का इलाज करवाना चाह रही हे उनकी बेटी बोल नहीं रही हे उनकी आँखों में आसू हे उनका सवाल पूछना जरुरी हे |
  2. दूसरी तस्वीर सामने आई वो जादूगर की, जादूगर हजारो सालो से  वहा तपस्या कर रहा हे बर्फ के पहाड़ में 
  3. तीसरी तस्वीर आई कछुवे की  जो ५०० साल से नदी में हे ड्रैगन बनना चाह रहा था |

फिर लड़के को अपनी तस्वीर सामने आई की सेठ के यहाँ पर लड़का काम कर रहा हे | लड़के ने सोचा में तो नोकरी कर ही रहा हु खाना खा ही रहा हु ठीक चल ही रहा हे थोड़ी और महेनत करूँगा तो कुछ न कुछ बदलूँगा इन तीन लोगो के जिंदगी में बदलाव लाना जरुरी हे इन तीनो के सवाल पूछना चाहिए | rj kartik

लड़के ने गौतम बुद्ध से तीनो के सवाल पूछे गौतम बुद्ध ने सबसे पहले मालकिन के सवाल का जवाब दिया उन्होंने कहा की उस मालकिन की जो बेटी हे २० साल की उसकी जेसे ही शादी होगी वो लड़की बोलना शुरु  कर देगी | दुसरे सवाल का जवाब देते हुए गौतम बुद्ध ने कहा जो जादूगर है उससे कहना की अपनी छड़ी छोड़ दे जिस दिन उसने छड़ी छोड़ देगा वो स्वर्ग चला जायेगा तीसरा सवाल था कछुवे का गोतम बुद्ध ने कहा की उस कछुवे से कहना की अपना कवच उतार दे जिस दिन उसने कवच उतर दिया वो ड्रैगन बान जायेगा | rj kartik

लड़के ने बुद्ध को प्रणाम किया और फिर से चल पड़ा अपने रस्ते सबसे पहेले कछुवा मिला उसने कछुवे से कहा की गौतम बुद्ध ने कहा है की तुम अपना कवच उतर दो तो ड्रैगन बन जाओगे | कछुवे ने कवच उतारा तो मोती ही मोती निकल पड़े कछुवे ने कहा में मोती का क्या करूँगा उसने लड़के को बोला ले जाओ उसने लड़के को मोती दे दिए और कछुवा ड्रैगन बन गया | rj kartik

थोडा आगे चला तो जादूगर मिला उसने जादूगर को बोला भैया आपको छड़ी छोड़ना पड़ेगी तभी आप स्वर्ग जा पाओगे जादूगर ने बोला ये लो आप छड़ी रख लो फिर जादूगर स्वर्ग चला गया और अब बरी आई तीसरे सवाल की लड़का पंहुचा उस हवेली में जहा उससे मालकिन ने एक सवाल पूछा था वह मालकिन से जा कर के बोला की मालकिन आपका जो सवाल था उसका जवाब मिल गया है | rj kartik

आपकी २० साल की बेटी की जिस दिन शादी हो जाएगी उस दिन ये बोलना शुरु कर देगी उन्होंने बोला क्या बात हे तो देर कैसी सामने ही तो दूल्हा बेठा हे तुमसे बढ़िया लड़का कोन मिलेगा लड़की को बुलाया गया दोनों ने एक दुसरे को पसंद किया और दोनों की शादी हो गई | rj kartik

जेसे ही शादी हुइ लड़की ने पहेली बात बोली की आप तोह वहि हो जो उस दिन रात में हमारे यहाँ आ कर रुके थे लड़की ने बोलना शुरु कर दिया |rj kartik

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लड़के के पास में पैसा ही पैसा आ गया क्युकी मोती ही मोती आ गए ताकत आ गई क्युकी जादू की छड़ी आ गई और लड़की मिल गई | शायद इसलिए उसने अपने सवाल का त्याग कर दिया था |
उसी तरह जेसे एक जहाज होता हे उसको दुसरे किनारे पर जाने के लिए अपने किनारे का त्याग करना पड़ता हे लहरों से भिड़ना पड़ता हे मुकाबला करना पड़ता हे इस लड़के ने जब तक अपना सवाल नहीं छोड़ा था इसको जवाब नहीं मिले थे ये छोटी सी कहानी लाइफ में बोहोत बड़ी बात सिखाती हे | rj kartik

अगर आप कुछ कमाल करना चाहते हो तो त्याग कीजिये उन बुरी आदतों का आलस्य का | सुबह जल्दी उठाना शुरु करिए तभी आप कमाल कर पाएंगे |

youtube video dekhe RJ Kartik ka  :





प्रवचन

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आपका दिन शुभ रहे धन्यवाद || 

सफलता के सूत्र जो भागवत गीता में बताए गए है ||

सफलता के सूत्र

आज के समय मे हर व्यक्ति अपने जीवन मे सफल होना चाहता है | सभी के पास अपने लक्ष्य है | और वह उसे पाने के लिए मेहनत कर रहे है | लेकिन क्या आप जानते है | की सफलता क्या है | सफलता का राज क्या है | व सफलता के सूत्र क्या है |
अधिकतर लोग अपने कार्य को पूरी मेहनत से करने मे लगे रहते है | पर सफलता हासिल नहीं कर पाते |जिसका कारण है -सफलता का अर्थ न समझना |

इस लेख (प्रवचन) मे कहानी के माध्यम से आपको पता चलेगा, की असल मे सफलता क्या है, सफलता
का राज क्या है, व जीवन मे सफलता कैसे पाए, और साथ ही सफलता के श्रीमद्भागवत गीता उपदेश पढ़कर आप सफलता का मूल मन्त्र व जीवन मे सफलता पाने के तरीके और सफलता के सूत्र जानेगे | तो आइए एक कहानी के माध्यम से शुरू करते है |

किसान व साधु की कहानी - सफलता के सूत्र

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एक गांव मे एक गरीब किसान रहता था | वह बहुत परिश्रमी था | दिन रात मेहनत करता व अपने परिवार के साथ ख़ुशी से रहता था | एक बार गांव मे एक साधु आए | किसान साधु को आदर के साथ अपने घर लाया | और उनके भोजन व स्नान की वयवस्था की | साधु उस किसान की भक्ति से प्रसन्न हुए | और कहा तुमने मेरा आदर सम्मान किया |
यदि तुम्हे कुछ परेशानिया हो तो कहो, मे उसे दूर करने मे तुम्हारी मदद करुगा | किसान ने कहा - हे महात्मा मे बहुत परिश्रम करता हु | लेकिन ये गरीबी दूर नहीं कर पा रहा हु | मे अपने जीवन मे सफल नहीं हो पा रहा हु | कृपया कर मुझे सफलता के सूत्र बताए | जिससे मे सफलता हासील कर सकू | साधु ने कहा ठीक है | मे तुम्हे सफलता के सूत्र बताऊंगा |
परन्तु उससे पहले ये जानना आवश्यक है, की सफलता क्या है |
सफलता क्या है
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 साधु ने कहा सफलता का अर्थ है 'आत्म संतुष्टि ' अर्थात जब आप संतुष्ट हो जाएगे, तो वही आपके लिए आपकी सफलता होंगी | साधु ने कहा - चलो इसे एक उदाहरण से समझते है | यदि आप एक किसान हैतो आपके लिए सफलता होंगी एक अच्छा घर, अच्छे कपडे और खाने के लिए अच्छे पकवान यदि आपको यह मिल जाता है | तो आप संतुष्ट हो जाओगे | और यही आपकी सफलता होंगी |
लेकिन यदि मे बात करता हु तुम्हारे राजा की, तो उसके लिए सफलता कई और राज्यों को जितने मे है | अर्थात आपके पास जो भी है | यदि उससे आप संतुष्ट है | तो आप सफल हो, अन्यथा एक राजा भी जिसके पास सबकुछ है | वह भी अपने आप को असफल मानेगा |
किसान ने कहा अब मे जान गया की सफलता क्या है | लेकिन यह हमारी आंतरिक सफलता है | हमारी बाह्य सफलता क्या है | व बाह्य सफलता के सूत्र क्या है |
साधु ने कहा -

जीवन की असल सफलता

  1. जब आप 4 वर्ष के होते है, तो आपकी सफलता होती है, की आप वस्त्रो को गिला नहीं करते |
  2. 8 वर्ष की सफलता यह है, की आप अपने घर वापस आने वाले मार्ग को भूलते नही है |
  3. 12 वर्ष की सफलता यह है, की आप अपने कुटुंब मे अच्छे रिश्ते बना सके |
  4. 18 वर्ष की सफलता यह है, की आप मदिरा, व अन्य दूषित कर्मो से दूर रहे |
  5. 25 वर्ष की सफलता यह है,की आप अपने व्यवसाय या कार्य करने के लिए निकल पड़े |
  6. 30 वर्ष की सफलता यह है, की आपका पारिवारिक वयक्तित्व अच्छा हो |
  7. 35 वर्ष की उम्र मे आपके लिए सफलता है, की आप धन बचाने की कला सीखे |
  8. 45 वर्ष की उम्र मे सफलता यह है, की आप अपना युवापन बरकरार रखे |
  9. 55 वर्ष की उम्र मे आपकी सफलता यह है, की आप अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने मे सक्षम हो |
  10. 65 वर्ष की उम्र मे आपकी सफलता यह है, की आपका शरीर अभी भी निरोगी हो |
  11. 70 वर्ष की उम्र मे सफलता यह है, की आप किसी के ऊपर निर्भर न रहे आप आत्मनिर्भर रहे |
  12. 75 वर्ष की उम्र मे आपकी सफलता यह है, की आप अपने पुराने मित्र या रिश्तेदारो से अब भी मिलते हो |
  13. 80 वर्ष की उम्र मे आपकी सफलता यह है, की आपको अब भी अपने घर का मार्ग याद हो |
  14. 85 वर्ष की उम्र मे पुनः आपकी सफलता यह है, की आप अपने वस्त्र गीले न करते हो |
किसान ने कहा - अब मै यह जान चूका हु, की असल मे सफलता क्या है, परन्तु यदि इन नियमों का पालन हम कर पाते तो हम भी साधु न बन जाते | हमारे जीवन मे कई सारी चुनौतियां व लक्ष्य सामनेआते है | हम उन पर सफलता कैसे हासिल करे |
हे महात्मा, मुझे सफलता का मूल मन्त्र व सफलता पाने के तरीके , सफलता के सूत्र बताए |

सफलता का रहस्य


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साधु ने कहा चलो मेरे साथ और दोनों जंगल की और चल दिये | चलते चलते वे दोनों एक आम के बाग के पास पहुचे | साधु ने कहा - मुझे आम खाना है | क्या तुम मुझे कुछ आम लाकर दे सकते हो | पेड़ काफ़ी ऊंचे थे | और किसान को उनपर चढ़ना नहीं आता था | वह तुरंत पत्थर मारकर आम तोड़ने की कोशिश करने लगा | पर आम नहीं गिरे | उसने सोचा की ये पेड़ काफ़ी ऊंचा है | वह किसी और पेड़ के निचे गया, और पत्थर मरना शुरू किये | परन्तु इस बार भी आम नहीं गिरे | और इसी तरह किसान पेड़ बदलता रहा, लेकिन आम न लेकर आ सका | और निराश होकर साधु के पास लौट गया |

साधु के पूछने पर उसने सारी बाते बता दी | साधु हसने लगा | और उस किसान को समझाने लगा | की जब तुमने एक पेड़ पर बहोत सारे पत्थर मारे फिर भी आम न गिरने पर तुमने पेड़ ही बदल दिया | लेकिन आम तोड़ने का तरीका नहीं बदला | और इसी तरह तुमने हर बार पेड़ बदला | लेकिन तरीका नहीं बदला | मानाकी पेड़ ऊंचा था | लेकिन जितना प्रयास तुमने अलग-अलग पेड पर किया | उतना एक ही पेड़ पर करते | पेड़ नहीं तरीके को बदलते, तो शायद तुम आम तोड़ने मे सफल हो जाते |

सफलता के मूल मंत्र

साधु ने कहा - यही तुम्हारे जीवन मे भी होता है | आप अलग अलग छेत्रो मे कार्य करते हो | और जब एक काम सफल नहीं हो पाते | तो उसे बदल कर दूसरे काम मे लग जाते हो |

और इस तरह आप अपनी ऊर्जा को बाट देते हो |

यदि आपको अपने जीवन मे सफल बनना है | तो पहले आपको अर्जुन बनना होगा | जिसे केवल चिड़िया की आँख दिखती है| उसी प्रकार आपको केवल आपका लक्ष्य दिखना चाहिए |
यही सफलता का मूल मन्त्र व सफलता के सूत्र है

सफलता कैसे पाए

किसान ने कहा- की यह बात तो मे समझ गया | लेकिन मेरे पास तो कोई लक्ष्य ही नहीं है | मुझे तो सुबह से खेतो मे मेहनत करना पड़ता है | जो मे हमेशा से करता आया हु | क्या आप मुझे कोई लक्ष्य दे सकते है | साधु ने कहा ठीक है | तुम बस खाना खाने से पहले रोज भगवान की पूजा कर लिया करना |

किसान ने कहा इसमें तो काफ़ी समय लग जाएगा | शायद मुझसे ये न हो पाएगा | साधु ने कहा ठीक है, तुम खाना खाने से पहले अपने घर से निकलकर अपने मित्र को ही देख लेना | जो तुम्हारे घर के आगे रहता है | हर चीज भगवान का ही अंश है | लेकिन तुम्हे यह नियमित करना होगा | किसान ने कहा ठीक है
और वह इस सफलता के सूत्र को जानकर साधु से आज्ञा लेकर, घर आ गया |

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नियमितता का फल

अब वह रोज खाना खाने से पहले उसके मित्र को देखता | काफ़ी समय बीत गया | एक दिन जब वह खाना खाने से पहले उसे देखने गया | तो वह घर पर नहीं था | वह सुबह सुबह ही खेत की और चला गया था | किसान थोड़ा जल्दी मे था | तो वह दौड़कर खेत की और चला गया | वहा उसका मित्र कुछ कार्य कर रहा था | और अचानक उसके मित्र को सवर्ण से भरा एक घड़ा मिल गया |

किसान ने दूर से ही अपने मित्र को देख लिया | परन्तु वह उस घड़े को नहीं देख पाया था | और लौटने लगा | तब तक उसके मित्र ने भी उसे देख लिया | और सोचा की शायद वह इस घड़े को दुख चूका है | मित्र घबरा गया | और उसने किसान को आवाज लगाई | और पास बुलाने लगा | किसान ने कहा नहीं अब मे जा रहा हु | मैंने तुम्हे देख लिया है | उसके मित्र ने कहा - तुमने मुझे देख लिया तभी तो बुला रहा हु | और दोनों ने आपस मे सवर्ण मुद्राओ को बाट लिया |

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और इस तरह किसान सफलता के सूत्र का पालन करते हुए धन समृद्धि से भरपूर हो गया |


भागवत गीता में बताए गए सफलता के सूत्र -


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सफलता पाने के लिए भागवत गीता ज्ञान या महाभारत गीता ज्ञान, इन सफलता के सूत्र को अपनाकर आप अपने जीवन मे हर कार्य मे सफल हो पाएगे |

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 1  
" क्रोध से भ्रम पैदा होता है, और भ्रम से बुद्धि भ्रष्ट होती है,और जब बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, तो तर्क नष्ट हो जाता हैऔर जब तर्क नष्ट हो जाता है, तो व्यक्ति का पतन निश्चित है "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 2 
 "जो मन को नियंत्रित नहीं करते,उनके लिए मन ही सबसे बड़ा शत्रु बन जाता है "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 3 
" आत्म ज्ञान के तलवार से काटकर,अपने हृदय से अज्ञान के संदेह को दूर कर दो,अनुशासित रहो, उठो, जागो, और आगे बड़ो "
|| सफलता के सूत्र ||
श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 4 
" मनुष्य अपने विशवास से ही निर्मित होता है,वह जैसा जैसा विशवाश करता है,वैसा ही बनता जाता है "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 5 
" इस जीवन मे कुछ भी नहीं खोता, न ही कुछ भी व्यर्थ जाता हैअर्थात आप जो कुछ भी कर रहे है,आज नहीं तो कल आपको उसका फल अवश्य मिलेगा "
|| सफलता के सूत्र ||



गीता के अनुसार सफलता के सूत्र


श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 6 
"अप्राकृतिक कर्म तनाव पैदा करते है,अर्थात मनुष्य को ऐसा कोई भी कर्म नहीं करना चाहिएजिसे करने की मनाही हो "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 7 
"जब आप अपने कार्य मे आनंद खोज लेगे,तभी आपको पूर्णता प्राप्त होती है "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 8 
"अपनी सोच को सकारात्मक बनाएक्युकी आपकी सोच ही आपको सफल दिलाएगी "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 9 
"परिश्रम ही सफलता की कुंजी है "
|| सफलता के सूत्र ||

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश - 10 
"कर्म करो फल की चिंता मत करो "
|| सफलता के सूत्र ||

इस लेख (प्रवचन) मे आपको बताया गया - सफलता क्या है, जीवन मे सफलता पाने के तरीके, सफलता के सूत्र व सफलता के लिए श्रीमद्भागवत उपदेश जिसे अपनाकर आप भी अपने जीवन मे सफल हो सकते हो

प्रवचन

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आपका दिन शुभ रहे धन्यवाद || 

नव वर्ष - 2020 विक्रम संवत - 2076 ( हिन्दू नव वर्ष )

नव वर्ष - 2020 विक्रम संवत - 2076 ( हिन्दू नव वर्ष )


  नव वर्ष शुरू होने वाला है, और ये बहुत अच्छा मौका है | अपने जीवन की नई शुरुआत करने का, हो सकता हो पुराने वर्षो मे आपको बहुत सारे दुखो व समस्याओ का सामना करना पड़ा होगा | लेकिन आपको नए साल से पुनः नए जीवन की शुरुआत करने का अवसर मिला है |

इस लेख मे आपको कुछ सफल जीवन जीने के नियम बताए जाएगे | अपने नए साल मे इन नियमों का नियमित पालन कर आप अपने जीवन मे धन, स्वास्थ्य व सुख समृद्धि का लाभ पा सकते है | और इस लेख के अंत मे बताया ज्ञान है, की नव वर्ष कैसे मनाए ? नए साल की शुरुआत कैसे करें ? नव वर्ष के दिन क्या करें ?

आइए जानते है की आप नये साल से अपने जीवन मे क्या परिवर्तन करें जिससे आप नव वर्ष के साथ अपने जीवन मे परिवर्तन कर सके -

1) घर मे सुख - शांति के लिए :



यह कुछ नियम नव वर्ष मे आपके जीवन मे कई बदलाव ला सकते है | नए साल मे इन्हे अपनाकर बेहतर तरीके से नए साल की शुरुआत करें |



  • बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से बुरे सपने आते हैं |
  • घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखें, इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है |
  • धूप, दीप, आरती, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर न बुझाएं |
  • घर के मुख्य द्वार पर दाईं तरफ स्वस्तिक बनाएं |
  • घर में कभी भी जाले न लगने दें, अन्यथा घर में राहु का असर रहेगा |
  • शाम के समय न सोएं | रात्रि में सोने से पहले अपने इष्टदेव का स्मरण अवश्य करें |
  • घर के मध्य भाग में जूठे बर्तन साफ करने का स्थान नहीं बनाना चाहिए |


2) धन समृद्धि के लिए :




  • घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें | उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से निकलें, अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है |
  • नल से पानी का टपकना आर्थिक क्षति का संकेत है | टपकते नल को जल्द से जल्द ठीक करवाएं |
  • कभी भी ब्रह्ममुहूर्त या संध्याकाल को झाड़ू नहीं लगाना चाहिए | झाड़ू को ऐसी जगह रखें, जहां किसी अतिथि की नजर न पहुंचे |
  • शर्ट और पेंट की जेब फटी हो तो उसे ठीक करवाएं | और बटुए या रुपए को पेंट की पीछे वाली जेब में न रखें |
  • पूजाघर के अलावा देवी या देवता की मूर्ति या चित्र घर के अन्य किसी हिस्से में न लगाएं |
  • श्री महालक्ष्मी का ध्यान करके मस्तक पर शुद्ध केसर का तिलक लगाएं और प्रतिदिन सुबह और शाम को कपूर जलाएं |
  •  सोने से पूर्व पैरों को ठंडे पानी से धोना चाहिए किंतु गीले पैर लेकर नहीं सोना चाहिए | इससे धन का नाश होता है |
  • घर में या वॉशरूम में कहीं भी मकड़ी का जाला न बनने दे | व घर में कहीं भी कचरा या अटाला जमा न होने दें|
  • नित्य देहरी की पूजा करने से व देहरी के आसपास घी के दीपक लगाने से घर में स्थायी लक्ष्मी निवास करती है |
  • संधिकाल में अनिष्ट शक्तियां प्रबल होने के कारण इस काल में निम्नलिखित कार्य न करें - सोना, खाना-पीना, गालियां देना, झगड़े करना, अभद्र एवं असत्य बोलना, क्रोध करना, शाप देना, यात्रा के लिए निकलना, शपथ लेना, धन लेना या देना, रोना, वेद मंत्रों का पाठ, शुभ कार्य करना, चौखट पर खड़े होना|


यह कुछ नियम अपनाकर आप नए साल मे धन संबंधित परेशनियो से बच सकते है और बेहतर तरीके से नव वर्ष से अपने नये जीवन की शुरुआत कर सकते है |

3) कुछ वास्तु टिप्स :




वास्तुशास्त्र हमारे जीवन मे अहम् भूमिका निभाता है | इन वास्तु टिप्स को अपनाकर आप बेवजह हो रहे ग्रह कलह व परेशनियो को दूर कर सकते हो | इस नव वर्ष मे इन नियमों का पालन करें और अपने नए साल की शुरुआत करें |

  • हर गुरुवार को तुलसी के पौधे को दूध चढ़ाना चाहिए |
  • तवे पर रोटी सेकने से पूर्व दूध के छींटे मरना शुभ है |
  • मकान मे तीन दरवाजे एक ही रेखा मे न रखे |
  • सूखे फूल घर मे न रखे |
  • घर में टूटी-फूटी, कबाड़, अनावश्यक वस्तुओं को नहीं रखें।
  • पलंग पर स्टील के बर्तन न रखें, इससे स्वास्थ्य लाभ में कमी आ सकती है |
  • तुलसी के गमले में दूसरा और कोई पौधा न लगाएं, ऐसा करने से धनहानि हो सकती है या बनते काम बिगड़ सकते हैं |
  • घर में तुलसी का पौधा पूर्व दिशा की गैलरी में या पूजा स्थान के पास रखें |
  • घर में रोज सुबह या समय-समय पर गौमूत्र का छिड़काव करना चाहिए। गौमूत्र की तेज गंध से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और वातावरण पवित्र होता है |
  • सुख-समृद्धि के लिए घर के दरवाजे पर स्वस्तिक या श्री गणेश का चिह्न लगाएं |

4) आध्यांत्मिक मार्ग पर चलना शुरू करें  :



आध्यत्मिकता का ज्ञान होने से आप अपने जीवन मे सही निर्णय ले पाएगे और अपने जीवन को सही राह पर लेकर चल पाएगे | आध्यांत्मिक व्यक्ति बनने के लिए आपको ज्ञान की खोज करते रहना होगा | नए साल मे लगातार बेहतर व्यक्ति बनने का प्रयास करते रहे | सकारात्मक लोगो के साथ रहे व स्वयं भी सकरात्मकता फैलाते रहे |
प्रेरणादयाक, पौराणिक पुस्तकों व शैक्षिक गतिविधियों मे लगे रहे | अगर सरल शब्दों मे कहा जाए तो आपको
आध्यांत्मिक व्यक्ति बनने के लिए लगातार बढ़ते रहना है और हिन्दू नव वर्ष मे बेहतर इंसान बनने के मार्ग पर
चलते रहना है |

अभी तक आपने जाना की नए साल मे आप किस प्रकार नित्यप्रति दिन के कार्यों मे बदलाव कर अपने जीवन को सुखमय बना सकते हो | और अब आप जानोगे की नए साल के दिन आपको क्या करना चाहिए ? नव वर्ष (1 जनवरी ) को कैसे मनाए? किस प्रकार नए साल की शुरुआत करें ? आइए जानते है नए

5) साल की जानकारी -




सबसे पहले सुबह उठकर अपने घर की सफाई करें | फिर स्नान करके पुरे घर मे गोमूत्र का छिड़काव करें, जिससे घर शुद्ध हो जाएगा | फिर अपने घर, ऑफिस या दुकान के गेट पर ॐ, श्री या स्वस्तिक बनाए | और ध्यान रखिए स्नान कर आपको अच्छे वस्त्र पहनना है और उनपर इत्र का छिड़काव करना है |

अपने नहाने के पानी मे थोड़ा सा दूध और हल्दी डालकर स्नान करें | और घर की स्त्रियों को लाल रंग के वस्त्र पहनना चाहिए क्युकी यह समृद्धि को आकर्षित करता है | और माता लक्ष्मी का निवास आपके घर मे हमेशा बना रहेगा | पुरुषो को क्रीम या सफेद रंग के वस्त्र पहनना है |

स्नान के बाद आपको ताम्बे के लोटे मे जल लेकर उसमे थोड़ा सा सिंदूर व गुड़ मिलाकर सूर्य भगवान को अर्ग देना है | अब ताम्बे, पीतल या चांदी के लोटे मे पंचामृत लेकर शिव जी का और अपने इष्ट देव का अभिषेक करें | और ॐ रुद्राय नमः मन्त्र का जाप करें | इस दिन आप जो भी भोजन बनाए पहला टुकड़ा गौ माता के लिए निकाल ले | और नव वर्ष के दिन दान करना न भूले | ध्यान रखे इस दिन आपको कोई भी अशुभ काम नहीं करना है जैसे - बाल काटना, चुगली करना, क्लेश करना, किसी से झगड़ना व मास मदिरा का सेवन करना |

इस प्रकार नये साल मे इन नियमों का पालन कर आप नए साल की शुरुआत के साथ अपने नए जीवन की भी शुरुआत कर सकते है | और अपने पुराने दुखो व समस्याओ को भुलाकर नव वर्ष से नए जीवन को शुरू कर सकते है | यह थी कुछ नए साल की जानकारी जिससे आपको अपने जीवन को सही तरह से जीने मे मदद मिलेगी | आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए | नव वर्ष -2020, विक्रम संवत - 2076 ( हिन्दू नव वर्ष )


प्रवचन

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आपका दिन शुभ रहे धन्यवाद || 

चिंता कैसे दूर करे | तनाव क्या है ? और तनाव के कारण

चिंता कैसे दूर करे!


 चिंता कैसे दूर करे


यदि आप अपने दैनिक जीवन मे रोज मर्रा के परेशनियो मे उलझें रहते है | जिससे दिमाग़ मे टेंशन चिंता, तनाव  बढ़ने लगता है | और इस वजह से आप हमेशा निराश रहते है | तो यह लेख प्रवचन आपके लिए है | इस लेख मे बताया गया है - की तनाव क्या है? व चिंता कैसे दूर करें ? इस लेख मे तनाव के कारण, तनाव के नुकसान, टेंशन के लक्षण व मानसिक तनाव से मुक्ति  के उपाय बताए गए है | इस लेख को पड़ने से आपको अपने मानसिक तनाव का कारण पता चलेगा और आप जान पाएगे की चिंता कैसे दूर करें |


तनाव क्या है ?


चिंता कैसे दूर करे!


दैनिक जीवन मे आपको कई प्रकार की परेशानियो से गुजरना पड़ता है | जैसे परिवार को लेकर चिंता, स्वास्थ्य, आर्थिक तंगी व आपसी सम्बन्धो को लेकर चिंता, किये गए कार्यों के गलत या बुरे परिणाम आना, या किसी के दबाव मे कार्य करना | इन सभी चीजों से आप परेशान होने लगते है | और आपकी सोचने समझने की शक्ति कम होने लगती है | इसे ही तनाव या चिंता कहते है | शायद आप मानसिक तनाव का अर्थ जान चुके है | और अब इस लेख मे आप जानेगे की चिंता कैसे दूर करें | आइए एक कहानी के माध्यम से शुरू करते है |


एक राजा की कहानी :


चिंता कैसे दूर करे!


एक बार राजा ने साधु से पूछा मेरा चित्त अशांत है | मेरे भीतर निरंतर अशांति मची रहती है | मुझे बताए की चिंता कैसे दूर करें | मुझे कोई टेंशन दूर करने का मन्त्र बताए | साधु ने राजा से कहा आप कल सुबह ब्रह्ममुहृत मे यहां आए | और अकेले आए जब मेरी कुटिया मे कोई भी न हो | और याद रहे अपने अशांत चित्त को साथ लेकर आए | उसे घर पर न छोड़े | तभी मे बताउगा की चिंता कैसे दूर करें | राजा घबरा गया | उसने सोचा साधु कह रहे है - की अपने अशांत चित्त को साथ लेकर आना उसे घर पर मत छोड़ना अन्यथा मे उसे शांत कैसे करुगा |

चिंता कैसे दूर करे!

राजा घर गया लेकिन पहले से भी ज्यादा अशांत होकर गया | उसने सोचा था की यह तो संत है | कोई मन्त्र देगा लेकिन यह तो बेकार है | कोई अपने चित्त को घर पर कैसे छोड़ कर आ सकता है | राजा को रात भर नींद नहीं आई | सुबह उठकर राजा साधु के पास अपने प्रश्न चिंता कैसे दूर करे के उत्तर को जानने के लिए चल दिया | वहा पहुंचते ही साधु ने पूछा - आ गए क्या तुम, अपना अशांत चित्त साथ लाए हो न, कहा है वो |
मे उसे शांत करने के लिए बैठा हु | राजा ने कहा हा लाया हु | लेकिन यह तो कोई वस्तु नहीं है न, जो मे आपको अपने हाथ मे लेकर दिखाऊ | अब मुझे जल्दी से बताए की चिंता कैसे दूर करें ? साधु ने कहा ठीक है | बैठ जाओ और आंखे बंद करो | और खोजने की चेष्टा करो की तुम्हारा चित्त कहा है | और तुम जैसे ही उसे पकड़ लो मुझे बताना मे उसे शांत कर दुगा | 
राजा को जानना था, की चिंता कैसे दूर करे ? राजा अपने भीतर खोजने लगे | उन्होंने हर जगह खोजा की, कहा है वो मन जो इतना अशांत है | और जितना उसने खोजा उसे पता चला की अशांति तो विलीन हो गई है | छाया की तरह मन खो गया था |

चिंता कैसे दूर करे!


2 घंटे बीत गए थे | और राजा को पता भी नहीं था, की क्या हो रहा है | उसका चेहरा शांत हो चूका था | तब साधु ने कहा - अब आँखे खोलो इतना पर्याप्त है | क्या अब तुम बता सकते हो, की वो मन कहा है, कहा है तुम्हारा चित्त, राजा इतना शांत था, जितना की एक मनुष्य हो सकता है | और उसने साधु के चरणों मे सिर रख दिया | और कहा तुमने उसे शांत कर दिया है | अब मझे पता चल चूका है | की चिंता को कैसे दूर करे | साधु ने कहा तुम्हारा मन कैसे शांत हो गया ? राजा खुश हो गया, उसने कहा - मैंने अपने मन को खोजने की कोशिश की, की वह कहा है | और मुझे अपनी सारी समस्याओ का हल मिलता गया | और मुझे टेंशन दूर करने का मन्त्र भी मिल गया | और साधु को धन्यवाद कर राजा अपने राज्य मे लौट आया |

चिंता कैसे दूर करे!


इसी तरह यदि आप भी तनाव या टेंशन मे है | तो सबसे पहले अपने मन को खोजिए, की वह कहा है | किस वजह से आप इतना परेशान है | यदि आप को अपनी समस्या पता चल जाती है | तो उसका समाधान भी मिल ही जाएगा | अब शायद आप जान गए होंगे, की चिंता कैसे दूर करें | इस लेख के अंत मे आपको कुछ मानसिक तनाव से मुक्ति के उपाय, तनाव दूर करने के लिए योग व मानसिक रोगों के लिए योग बताए गए है | जिसका पालन कर आप तनाव या टेंशन को दूर कर सकते है |


तनाव के कारण :


  1. मनचाही नौकरी न मिल पाना |
  2. आर्थिक तंगी से परेशान रहना |
  3. किये गए कार्य का उचित परिणाम न आना |
  4. किसी कार्य को करने मे बार बार असफल होना |
  5. अपनी शारीरिक संरचना को लेकर हीनता महसूस करना |
  6. किसी भी बात पर बार बार सोचते रहना |
  7. नींद पूरी न हो पाना |
  8. पारिवारिक समस्याए उत्पन्न होना |
  9. किसी लम्बी बीमारी से ग्रसित होना |
  10. अनचाहे कार्य को किसी के दबाव मे आकर करते रहना या मनचाहे कार्य को न कर पाना | 
यह सभी तनाव के कारण है | जिससे आपके दिमाग़ मे तनाव या टेंशन उत्पन्न होता है | और इससे यह भी पता चलता है | की ज्यादा टेंशन लेने से क्या होता है | आइए अब जानते टेंशन के लक्षण और फिर आप जानेगे तनाव कैसे दूर करें |


चिंता कैसे दूर करे!


टेंशन के लक्षण या दीमाग की बीमारी के लक्षण :


  1. सिर मे दर्द होना टेंशन का पहला लक्षण है, जो टेंशन आने पर हमे प्रत्यक्ष रूप से पता चल जाता है |
  2. अच्छी नींद न आना भी मानसिक तनाव को दर्शाता है |
  3. जब आप टेंशन मे रहते है, तो आपको छोटी छोटी सी बात पर बार बार गुस्सा आता है |
  4.  साथ ही साथ आपकी याददाश्त भी कम हो जाती है, और आपकी सोचने समझने की शक्ति कम होने के कारण आप सही निर्णय नहीं ले पाते |
  5. नकारात्मक विचारों का आना भी मानसिक तनाव को दर्शाता है |
  6. जब आप टेंशन मे रहते है, तो थकान, कमजोरी व चिड़चिड़ापन महसूस होता है |
  7. सामान्य बातो पर भी अचानक क्रोधित हो जाना भी मानसिक तनाव का लक्षण है |
  8. टेंशन मे व्यक्ति हिंसक व्यवहार करने लगता है |
  9. अचानक से वजन का बढ़ना या घटना भी तनाव बढ़ने का प्रमाण है |
  10. हमेशा सोचते रहना और किसी की बातो पर ध्यान न देना |


यह सभी टेंशन या मानसीक तनाव के या दीमाग की बीमारी के लक्षण है | इनसे आप पता कर सकते है की क्या आप भी मानसिक तनाव से ग्रसित है | यहां कई तरह के मानसिक तनाव के नुकसान है | तो आइए जानते है की इनसे कैसे बचे और चिंता कैसे दूर करें |

चिंता कैसे दूर करे या मानसिक तनाव से मुक्ति के उपाय :


चिंता कैसे दूर करे!


  1. हमेशा सकारात्मक सोच रखे, नकारात्मक भावो को अपने से दूर रखे |
  2. स्वयं के लिए समय निकले जिससे आप जीवन के हर पहलु को ठीक से देख पाए |
  3. सुबह जल्दी उठे व वयायाम और योग मे अपना समय लगाए |
  4. नशे से दूर रहे |
  5. पर्याप्त व गहरी नींद भी तनाव कम करने मे सहायक है |
  6. अध्यात्म को अपनऐ, जिससे आप अपने जीवन को सही दिशा मे ले जा पाएगे, और तनाव से मुक्त रहेंगे|
  7. झूठ न बोले | झूठ बोलना भी मानसिक तनाव का कारण बन सकता है |
  8. पौराणिक व धार्मिक किताबों का अध्ययन करें |
  9. बुरी आदतों को त्याग कर अच्छी आदतों को ग्रहण करे |
  10. अच्छा भोजन करें व मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दे, और एक बार मे एक से ज्यादा काम न करे |
मानसिक तनाव के लिए योग या तनाव दूर करने के लिए योग :

  •  सुखासन
  • अंजलि मुद्रा
  • मर्जरी आसन
  • सालंब शीर्षासन
  • बलासन
  • शवासन


यह कुछ मानसिक तनाव के लिए योग व तनाव दूर करने के लिए योग है | जिसका प्रयोग कर आप
मानसिक तनाव से मुक्ति पा सकते है |

अपने जीवन मे तनाव मुक्त रहने के लिए हमेशा खुश रहो | छोटी छोटी बातो पर मुँह न फुलाया कर |
यही भी तनाव मुक्त रहने का तरीका है | जीवन मे छोटी छोटी परेशनिया आती रहती है| लेकिन उसका
टेंशन न ले | क्युकी कोई भी समस्या या परेशनी ज्यादा समय तक नहीं टिकती |

टेंशन शायरी : 

"गम मेरे साथ दूर दूर तक गए,
जब मै नहीं थका, तो थक गम गए"

टेंशन शायरी 

"ज़िंदगी में टेंशन ही टेंशन है,
फिर भी इन लबों पर मुस्कान है |
क्योंकि जीना जब हर हाल में है,
तो मुस्करा के जीने में क्या नुक्सान है |"

टेंशन शायरी 

"सावधान ! टेंशन लेना स्वास्थ के लिए हानिकारक है |"


चिंता कैसे दूर करे!

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